सहेली समिति के द्वारा महाधिवेषन कार्यक्रमः

स्वंय सहायता समूह के सदस्यों के द्वारा महाधिवेषन आयोजित किया गया जिसमे लगभग 8500 महिलाओं ने रेली निकाल कर महिला संगठन को प्रदर्शित किया। महाधिवेशन मे महिलाओं ने कार्यक्रम के द्वारा साक्षरता एवं आजीविका के बारे मे संदेश पहॅुचाया। श्रीमान् जिला कलक्टर ने महिलाओं को आगे बढने एवं नरेगा कार्यक्रम मे जुडने के बारे मे विस्तार से बताया।

स्वयं सहायता समूहों को सरकार की योजना से जोडना

सहेली समिति के द्वारा संचालित 605 स्वंय सहायता समूहों को विष्व बैंक की राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परियोजना से जोडा गया है जिनको राजस्थान सरकार की राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परियोजना के द्वारा क्लस्टरों को त्मअवसअपदह थ्नदक राषि 3 करोड 69 लाख रूपये दिये गये है जिससे स्वयं सहायता समूहों को आजीविका के लिये क्लस्टर से लगभग 125000 रू. का ऋण दिया गया है जिससे स्वयं सहायता समूह की महिलायें आजीविका के साधन क्रय कर अपना रोजगार चला रही है।

बैरोजगार युवको को रोजगोर से जोडना

स्वयं सहायता समूह के परिवार के नवयुवक जो कि 18 वर्ष से 21 वर्ष तक है जिन्होने 10 वी पास किया है उनको मारूती सुजुकी कम्पनी, एफ.एम.बी. एवं टाटा कम्पनी मे भेजा है जहॉ 104 युवको को रोजगार दिलवाया गया है जहॉ पर ये युवक प्रति माह 11000 रू. से 12000 रू कमा रहे है।

मनरेगा मे गरीब पात्र परिवार को 100 दिन का रोजगार दिलवाना

मनरेगा के अन्तर्गत 400 परिवार को मनरेगा मे 100 दिन का कार्य करने हेतु चिन्हित किया गया है इसी के अन्तर्गत 60 महिला मेट का प्रषिक्षण दिलवाया गया है।

जनसखि के द्वारा गॉव मे परिवारों को चिन्हित कर होने वाली बीमारी को गॉव मे ही उपचार करना

जनसखि के द्वारा मोबाईल/टेब के द्वारा महिलाओ को प्रषिक्षण देकर किसी भी सदस्य को होने वाली बीमारी को मोबाईल के माध्यम से डॉक्टर तक इसकी सूचना पहुचाना एव डॉक्टर के द्वारा सम्बन्धित बीमारी को समझ का उसके उपचार के लिये दवाई मैसेज के द्वारा जनसखी तक पहुॅच जाता है जन सखि बीमार सदस्य हो वो दवा बता देती है जिससे वह परिवार समय पर अपनी बीमार का कम खर्च मे इलाज करवा सकता है।

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