कृषि एवं पशु संबंधी जानकारी

पृष्ठभूमि

नाबार्ड के वित्तीय सहयोग से और सहेली समिति, धौलपुर द्वारा धौलपुर जिले के ब्लॉक बाडी के 5 पंचायत मे सहेली क्लस्टर विकास द्वारा कृषि कार्य माह अप्रेल- 11 से कार्य आरम्भ किया गया । इस कार्यक्रम का मुख्य उद्येश्य ग्रामीणजन को कृषि कार्य मे सुलभ तरीके से उनको लाभ पहुॅचाना, किसानों को कृषि मे उन्नत पैदावार के लिये प्रशिक्षण प्रदान करना, और अधिक से अधिक कृषि के बारे मे जानकारी देना एवं बीज उत्पादन करना।


महिलाओं एवं पुरूषों कों कृषि सम्बन्धी जानकारी देना

धौलपुर व बाडी क्षेत्र मे ज्यादातर लोग खेतीबाडी से जुडे है जो कि वह अपने परिवार का भरण पोषण कृषि से ही करते है। उपलब्ध कृषि क्षेत्र मे सम्भावनायें होने के बावजूद जानकारी के अभाव मे ग्रामीण परिवार अपने खेत से अपने परिवार का भरण पोषण पूरे वर्ष नही कर पाता है। कमी को पूरा करने के लिये वह मजदूरी करता है। कृषि की उन्नत तकनीकि एवं जानकारी के साथ साथ परिवार की भोजन एवं नकद की आवश्यकताओ को ध्यान मे रखते हुये परिवार को इस प्रकार की जानकारी दी जाती है जिससे वह अपने खेत से परिवार का भरण पोषण भी पूरे वर्ष चल जाये एवं कुछ नकद राशि की भी बचत कर ले जिससे उसके जीवन स्तर मे सुधार ला सके। इसके लिये संस्था ने गॉव के ही 64 उन्नत किसानों को चुनकर गॉव के लोगो के लिये ही कृषि सहयोगी के रूप मे तैयार किया जो कि गॉव मे ही रहकर उन्हे कृषि के बारे मे जानकारियॉ देता रहे। कृषि सहयोगी को प्रत्येक फसल से पहले संस्था द्वारा उस फसल को उगाने की नई नई तकनीकियों की जानकारी के साथ प्रशिक्षण दिया जाता है । उसके बाद कृषि सहयोगी गॉव मे किसानों को जानकारी देता है एवं किसानों को फसल मे लगने वाली सामग्री जैसे कि खाद बीज आदि सही व उचित दाम पर खरीदने की सलाह देना, फसल अनुसार खेत को तैयार करना (साधारण तोर पर गॉव के किसान खेत तैयार करने मे 2000/- तक व्यय कर देते है जब कि वास्तविक तोर पर वह खेत 500/- मे तैयार हो सकता है।), बुबाई करते समय उचित बीज दर के लिये प्रेरित करना, समय समय पर

फसलो मे आने वाली समस्याओं के समाधान मे किसानों की सहायता करना, किसानो द्वारा फसल मे किये गये कार्यो का व्योरा रखना ताकि आगे आने वाले समय मे की होने वाली खामियों को दूर किया जा सके। इसके ऐवज मे कृषि सहयोगी को सहेली समिति के द्वारा मानदेय दिया जाता है । मानदेय देने के लिये समूह सत्यापित करता है कि कृषि सहयोगी ने समूह को प्रशिक्षण दिया है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत संस्था ने इस वर्ष 6000 परिवारों के साथ जुडकर रूपये 6250/- प्रति बीघा प्रति परिवार की दर से फसलो मे अधिक आमदनी प्राप्त हुई है जिससे संस्था के साथ जुड कर किसानों मे खेती के प्रति खोया हुआ विश्वास बापस आने लगा है और भविष्य मे खेती के द्वारा ही अपने परिवार को आगे ले जाने के लिये योजना बनाने लगे है। धौलपुर एवं बाडी मे इन व्यक्तियों का प्रशिक्षण दियाजाकर वह गॉव मे कार्य कर रहे है। सहेली समिति के द्वारा 35 कृषि सखियों का चयन करके उन्हे उन्नत फसल उत्पादन (मुख्य फसलें- बाजरा, सरसों गेंहू) का प्रशिक्षण दिया गया है ताकि वे गॉव मे समूह सदस्यों को प्रशिक्षण दे सकें। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत धौलपुर जिले के 24 गॉव मे लगभग 186 समूहों के साथ कृषि को बढावा देने का कार्य किया जा रहा है और साथ साथ परिवार की पोषण आवश्यकताओं का ध्यान में रखतें हुये महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना के अर्न्तगत 800 परिवारों के साथ किचिन गार्डन का कार्य भी किया जा रहा है। इसी प्रकार उन्नत पशु प्रबन्धन के लिये 19 पशु सखियों का चयन करके प्रशिक्षित किया गया है और वे 190 स्वयं सहायता समूहों के साथ प्रशिक्षण देने का कार्य कर रही है। इसके साथ साथ उनकी मुख्य फसलें बाजरा सरसों व गेंहू मे भी कृषि सखियों को प्रशिक्षण देकर उनके समूहों मे प्रशिक्षण दिया गया है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत 36 कृषि सखियों ने 108 समूहों मे उन्नत फसल प्रबन्धन का प्रशिक्षण देकर समूह सदस्यों की खेती के प्रति जागरूकता बढाई है। जिसमे किसानों को विपरीत परिस्थियों मे (अधिक वर्षा) मे भी परम्परागत की गई खेती के मुकाबले मे 2 से 3 मन बाजरा एवं सरसों की अधिक पेदावार मिली है, जिससे महिला किसानों मे इस कार्यक्रम के प्रति विश्वास बढा है एवं गेहूं की खेती मे भी किसानों को अच्छी पेदावार की उम्मीद है क्यों कि फसल मे अधिक फूट एवं बाल का आकार देखकर सभी किसान ये अनुमान लगा रहे है और जो किसान हमारे पी.ओ.पी. से छूट गये वे सभी आगे से इस तरीके को अपनाने के लिये तैयार है एवं गॉव गॉव मे योजनान्तर्गत बनाई गई 15 कृषि पाठशाला की उपयोगिता भी सिद्ध हुई है। कृषि पाठशाला पर उपलब्ध ट्रेनिगं मटेरियल के द्वारा महिला किसानों को प्रशिक्षण देने मे अच्छा लाभदायक सिद्ध हुआ है। ड्रजरी रिडक्शन टूल्स (यूरिया ब्रॉडकास्टर, डस्टर, स्प्रे मशीन, वीडर) आदि मशीनरी से भी काफी काम को आसान करने मे मदद मिली है।

पशुओ के स्वास्थ्य हेतु शिविर का आयोजन

सहेली समिति के द्वारा पशुओं के स्वास्थ्य हेतु निःषुल्क टीकाकरण व दवाईयॉ वितरण की व्यवस्था की जाती है। जिससे किसानो के पशुओं मे होने वाले रोगो से बचाव किया जा सके व समय समय पर टीकाकरण हो सके। सहेली समिति के द्वारा 7 पशु स्वास्थ्य शिविर निम्न गॉव में लगाये गये है जिसमे पशु टीकाकरण डिवर्मर, एवं मिनिमिक्स एवं केल्सियम का वितरण किया गया- 1. परौआ 2. बल्दियापुरा 3. विक्रमपुरा 4. कोलारी 5. सालेपुर 6. नौरंगाबाद 7. पिदावली उपरोक्त गॉव में शिविर लगाकर समूह की महिलाओं के पशुओं के लिये मुफ्त मे दवा वितरण की गई। शिविर के दौरान 2000 एच.एस. एवं 325 एफ.एम.डी के टीके लगवाये गये।

महिलाओ एंव पुरूषो को पेरावेट सम्बन्धी प्रशिक्षण देना

सहेली समिति के द्वारा कुल 18 पेरावेट जुडे है जिनको पेरावेट सम्बन्धी प्रशिक्षण देकर पशुओं की मृत्युदर को कम किया गया है। भैंस के बच्चे मर जाते थें क्यों कि उनको छोटे मोटे रोग लग जाते थे जैसें पेट मे कीडे पड जाने के कारण उनकी मृत्यु हो जाती थी अब उनको आसानी से बचा सकते है। जो भेंस कम दूध देती थी अब उनको जानकारी देकर भेंस के दूध मे बढोत्तरी कर उनकी आय मे वृद्धि हुई है। गॉव मे से एक व्यक्ति को रोजगार प्राप्त हुआ है एवं गॉंव के किसानों को पशुओं के इलाज के लिये शहर से डॉक्टर को बुलाना पडता था जिसका खर्चा ज्यादा होता था। अब गॉव के लोग मात्र 100 या 150 रूपये देकर पशु का इलाज आसानी से करा लेते है। एम.के.एस.पी. परियोजना के अन्तर्गत सहेली समिति मे 19 पशु सखि का चयन किया गया है जिनको प्रशिक्षण दिया गया। आज एक पशु सखि गॉव मे अपने समूह की बहिन जी को पशुओं के रखरखाव के लिये एवं उनके स्वास्थ्य के लिये पशु सखी द्वारा जानकारी दी जाती है।

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